आषाढ़ माह शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आज है। हर साल इस तिथि पर देवशयनी एकादशी मनाई जाती है। लाखों लोग इस तिथि पर व्रत-पूजन करते हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और व्रत करने से व्यक्ति से सभी काम सफल होते हैं। इसके बाद अगले 4 माह तक सभी शुभ कामों पर रोक लग जाती है इसे चातुर्मास भी कहते हैं, यानी विवाह, मुंडन, हवन, यज्ञ और तप जैसे सभी मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए।

क्यों नहीं करने चाहिए शुभ कार्य?

देवशयनी एकादशी के बाद से भगवान विष्णु 4 माह के लिए योग निद्रा में चले जाते है। माना जाता है कि भगवान विष्णु होते तो क्षीर सागर में हैं लेकिन उनका एक अंश पाताल लोक में निवास करता है। ऐसे में कोई भी धार्मिक या शुभ या मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। इससे राक्षसी प्रबलता को बल मिलेगा और संसार में अराजकता फैल सकती है। इसके बाद जब देवउठनी एकादशी आती है तो भगवान योग निद्रा से उठने हैं और संसार का फिर से संचालन शुरू करते हैं।

चातुर्मास के दौरान क्या न खरीदें

  • धर्म ग्रंथों के मुताबिक, चातुर्मास के दौरान सोने और चांदी जैसी धातुएं नहीं खरीदनी चाहिए क्योंकि इन धातुओं को सूर्य का प्रतीक माना गया है। ऐसे में इनकी खरीदारी से कुंडली में सूर्य कमजोर हो सकता है।
  • साथ ही इस दौरान काले रंग की कोई भी वस्तु न खरीदें, क्योंकि इससे आपकी कुंडली में शनि कमजोर होंगे। साथ ही शनि आपसे क्रोधित हो सकते हैं।
  • इसके अलावा, इस दौरान कोई भी वाहन नहीं खरीदने चाहिए, ऐसा माना जाता है कि अगर आपने कोई वाहन खरीदा तो उससे दुर्घटना होने की संभावना अधिक रहती है।
  • इसके साथ ही चातुर्मास में कोई भी इलेक्ट्रानिक गैजेट्स भी न खरीदें क्योंकि उसमें भी सोने का उपयोग होता है।

इस दौरान क्या करें?

चातुर्मास में रोजाना जल्दी उठें और सूर्यदेव को जल अर्पित कर प्रणाम करें। फिर भगवान शंकर के मंत्रों को जप करें क्योंकि इस दौरान सृष्टि के संचालक वही हैं। हो सके तो जरूरतमदों को अन्न, वस्त्र आदि दान करें।

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विकाश अग्रवाल 

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